दर्द: ममता लुटाई, त्याग किए…फिर भी मां अकेली रह गई, वृद्धाश्रम की चौखट पर थम गईं माता की उम्मीदें
अपने बच्चों के सपनों को सच करने के लिए मां दिन-रात मेहनत करती है। आज उसी मां को देखने वाला कोई नहीं। बुढ़ापे में सहारे की उम्मीद लिए आंखें ताकती रहीं, मगर अपने ही पराए हो गए। ऐसा दर्द वृद्धाश्रम में रहने वाली कई महिलाओं का है।
अपने बच्चों के सपनों को सच करने के लिए मां दिन-रात मेहनत करती है। आज उसी मां को देखने वाला कोई नहीं। बुढ़ापे में सहारे की उम्मीद लिए आंखें ताकती रहीं, मगर अपने ही पराए हो गए। ऐसा दर्द वृद्धाश्रम में रहने वाली कई महिलाओं का है।

